Saturday, May 21, 2016

Tips Part 1..........

आज से एक नई श्रंखला शुरू करने जा रहे है. जिस में कि भारतीय ज्योतिष शास्त्र अनुसार महत्वपूर्ण तथा सटीक उपाय के बारें में बताया जाएगा, इन  सरल और छोटे छोटे उपायों से आप अपने जीवन की सभी समस्याओं का लाभ ले  सकते है..

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अनिष्टकारी राहू की शान्ति के लिए  चाय की कम से कम 200 ग्राम पत्ती लेकर 18  बुधवार दान करने से राहू का अशुभ फल समाप्त होकर शुभ फल की प्राप्ति होती है .....


केतु ग्रह की शान्ति के लिए 7  बुधवार भिक्षुकों को अपने हाथ से सूजी का हलवा वितरण करें, तथा कुत्तों की सेवा करने से भी लाभ मिलता है....


अश्वगंधा की जड़ का एक टुकड़ा लेकर आसमानी रंग के कपड़े में लपेट कर अपने पास रखने से केतु ग्रह का दुष्प्रभाव ख़त्म हो जाता है....


सफेद चन्दन के एक टुकड़े नीले रेशमी कपड़ें में लपेट कर बुधवार से अपने पास हमेशा रखने से राहू की दशा में लाभ मिलता है.........




शुभमस्तु  !!

Friday, May 20, 2016

तिलक द्वारा भाग्य वृद्धि करें.....



भारतीय संस्कृति में तिलक का महतवपूर्ण स्थान है, बिना तिलक के कोई भी कार्य शुरू नही होता. बिना तिलक के रस्मों रिवाज भी नही होते है, अतः तिलक का महत्व इतना ज्यादा है कि इसके बिना विवाह आदि मंगल कार्य भी सफल नही होतें है..

तिलक से ही धर्म की पहचान होती है, कोई भी नया कार्य श्री गणेश जी की पूजा तथा तिलक के बिना संभव नही है, क्योंकि तिलक में एक ऐसी शक्ति कहो या ऊर्जा हैं जिसके द्वारा ब्रह्माण्ड स्थित सभी ग्रह वशीभूत रहते है तथा उसी ऊर्जा से सभी नर नारी भी वशीभूत होती है, वशीकरण कर्म में भी तिलक का बहुत योगदान रहता है इसके विषय में अलग से चर्चा करूंगा,

तिलक से मन और दिमाग का भी सम्बन्ध बना रहता है क्यों कि तिलक लगाने से मन शान्ति अनुभव करता है, तिलक लगाने से शरीर में एक विशेष ऊर्जा बस जाती है जिसके द्वारा दिन भर आलस्य दूर हो कर मन उत्साहित रहता है. अतः तिलक भारतवर्ष में एक अनुष्ठान की तरह प्रयोग किया जाता है.ये आज से नहीं, बल्कि प्राचीन काल से हमारे पूज्य ऋषि मुनियों ने तिलक के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रयोगों को हम सब के समक्ष रखा है.
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तिलक से भाग्य भी बदला जाता है.क्योंकि भाग्य वृद्धि करने वाले ग्रह ही है और तिलक उन अशुभ ग्रहों के फलों को शुभ बनाने में सहायक है,
तिलक के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी लिख रहा हूँ इसे अपना कर आप यदि नियमित रूप से तिलक करते है तो आप जैसा भाग्यशाली और कौन होगा अर्थात आपका भाग्य उदय होकर आपको सुख समृद्धि प्रदान करेगा, श्रद्धा और विश्वास द्वारा किया गया तिलक आपके सुख के लिए एक अच्छा सरल साधन बन सकता है.


सबसे पहले तिलक अपने इष्टदेव, गुरुदेव और फिर अपने पितृ के चित्र पर लगाना चाहियें. इनके बाद अपने मस्तक पर विधि अनुसार तिलक करें जिसका वर्णन अब करने वाला हूँ.


प्रतिदिन स्नान आदि से निवृत होकर तिलक लगाना चाहिए, कभी भूल कर भी बिना स्नान किये तिलक नही लगाना चाहिए, ऐसा अशुभ होता है.

आप अनामिका उंगली से देवताओं को तिलक करें तथा मनुष्यों को अनामिका तथा अंगूठे के योग से तिलक करना चहिये,

तिलक लगाने के बाद नींद नही लेनी चाहिए अर्थात कम से कम तीन घंटे तक नही सोना चाहियें,
चन्दन का तिलक लगाने से एकाग्रता बढती है, विद्यार्थी चन्दन का तिलक लगा कर शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते है.

कुंकुम और चावल का तिलक लगाने से आकर्षण बढ़ता है. और आलस्य भी समाप्त कर देता है.
केसर का तिलक प्रसिद्धि और यश को बढाता है, इसके द्वारा जो काम रुके हुए है वो भी जल्दी पूरे होने लगते है.

गोरोचन का तिलक लगाने से मुकद्दमें आदि तथा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.
अष्टगंध का तिलक बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, इसके द्वारा सभी प्रकार का ज्ञान तथा भेद मिलता है और सभी कार्य बिना बाधा के पूरे होते है.

सूर्य: आप अनामिका के साथ लाल चंदन का तिलक कर सकते हैं.

चांद: आप छोटी उंगली के साथ सफेद चंदन का तिलक कर सकते हैं.

मंगल ग्रह: आप अनामिका के साथ नारंगी सिंदूर का तिलक कर सकते हैं.

बुध: आप अनामिका के साथ अष्टगंध Asthgandha तिलक कर सकते हैं.

बृहस्पति: आप तर्जनी के साथ केसर का तिलक कर सकते हैं.

शुक्र: आप अनामिका के साथ चावल और अक्षत का तिलक कर सकते हैं.

शनि, राहु-केतु: आप तीन उंगलियों के साथ भस्म  या अगरबत्ती की भस्म या विभूति का तिलक कर सकते हैं..

आकर्षण के लिए:-

एक ताम्बें का बर्तन लेकर उसमें थोड़े से अखंडित चावल डाल कर उसमें थोड़ा गुलाब जल मिला कर पीस कर पेस्ट की तरह बना लें, तत्पश्चात उस पेस्ट का तिलक भगवान श्री कृष्णः जी को करें तदुपरांत स्वयं  करें इससे आप में आकर्षण शक्ति की वृद्धि होने लगेगी ऐसा प्रतिदिन नियमित करें तो जल्दी फल मिलेगा.इस तिलक करने वालों को मांसाहारी नही होना चाहिए, तथा मदिरा का सेवन भी नही करना चाहिए.

विजय प्राप्त करने लिए :-

लाल चन्दन लेकर उसे किसी पत्थर पर घिस कर किसी चांदी की कटोरी में रख कर माँ दुर्गा देवी के सामने रखें तथा ॐ दुं दुर्गाये नमः मंत्र का 27 बार जाप श्रद्धा से करें, जाप के बाद यदि आप पुरुष हो तो ये चन्दन माँ दुर्गा के चरणों में लगाये यदि महिला हो तो माँ दुर्गा के माथे में लगायें, माँ दुर्गा को तिलक लगाने के बाद अपने माथे पर तथा सिर में चोटी के स्थान पर और अपने दोनों कन्धों पर लगाने से प्रत्येक क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है, ऐसा लगातार करें..


 शुभमस्तु !!

बजरंग बाण की शक्ति से शत्रु परास्त करें..........

सिद्ध बजरंग बाण


भौतिक मनोकामनाओं की पुर्ति के लिये बजरंग बाण का अमोघ विलक्षण प्रयोग......... 
अपने इष्ट कार्य की सिद्धि के लिए मंगल अथवा शनिवार का दिन चुन लें। हनुमानजी का एक चित्र या मूर्ति जप करते समय सामने रख लें। ऊनी अथवा कुशासन बैठने के लिए प्रयोग करें। अनुष्ठान के लिये शुद्ध स्थान तथा शान्त वातावरण आवश्यक है। घर में यदि यह सुलभ न हो तो कहीं एकान्त स्थान अथवा एकान्त में स्थित हनुमानजी के मन्दिर में प्रयोग करें।


हनुमान जी के अनुष्ठान मे अथवा पूजा आदि में दीपदान का विशेष महत्त्व होता है। पाँच अनाजों (गेहूँ, चावल, मूँग, उड़द और काले तिल) को अनुष्ठान से पूर्व एक-एक मुट्ठी प्रमाण में लेकर शुद्ध गंगाजल में भिगो दें। 


अनुष्ठान वाले दिन इन अनाजों को पीसकर उनका दीया बनाएँ। बत्ती के लिए अपनी लम्बाई के बराबर कलावे का एक तार लें अथवा एक कच्चे सूत को लम्बाई के बराबर काटकर लाल रंग में रंग लें। इस धागे को पाँच बार मोड़ लें। इस प्रकार के धागे की बत्ती को सुगन्धित तिल के तेल में डालकर प्रयोग करें। समस्त पूजा काल में यह दिया जलता रहना चाहिए। हनुमानजी के लिये गूगुल की धूनी की भी व्यवस्था रखें।


जप के प्रारम्भ में यह संकल्प अवश्य लें कि आपका कार्य जब भी होगा, हनुमानजी के निमित्त नियमित कुछ भी करते रहेंगे। अब शुद्ध उच्चारण से हनुमान जी की छवि पर ध्यान केन्द्रित करके बजरंग बाण का जाप प्रारम्भ करें। “श्रीराम–” से लेकर “–सिद्ध करैं हनुमान” तक एक बैठक में ही इसकी एक माला जप करनी है।




गूगुल की सुगन्धि देकर जिस घर में बगरंग बाण का नियमित पाठ होता है, वहाँ दुर्भाग्य, दारिद्रय, भूत-प्रेत का प्रकोप और असाध्य शारीरिक कष्ट आ ही नहीं पाते। समयाभाव में जो व्यक्ति नित्य पाठ करने में असमर्थ हो, उन्हें कम से कम प्रत्येक मंगलवार को यह जप अवश्य करना चाहिए।

बजरंग बाण ध्यान.......


श्रीरामअतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं।
दनुज वन कृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्।।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं।
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।।

दोहा
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।।

चौपाई
जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।।
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।।
जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।।
बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा।।
अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा।।
लाह समान लंक जरि गई। जै जै धुनि सुर पुर में भई।।
अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।।
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख करहु निपाता।।
जै गिरधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर।।
ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारू बज्र सम कीलै।।
गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ। महाराज निज दास उबारों।।
सुनि हंकार हुंकार दै धावो। बज्र गदा हनि विलम्ब न लावो।।
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा।।
सत्य होहु हरि सत्य पाय कै। राम दुत धरू मारू धाई कै।।
जै हनुमन्त अनन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा।।
वन उपवन जल-थल गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।
पाँय परौं कर जोरि मनावौं। अपने काज लागि गुण गावौं।।
जै अंजनी कुमार बलवन्ता। शंकर स्वयं वीर हनुमंता।।
बदन कराल दनुज कुल घालक। भूत पिशाच प्रेत उर शालक।।
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल वीर मारी मर।।
इन्हहिं मारू, तोंहि शमथ रामकी। राखु नाथ मर्याद नाम की।।
जनक सुता पति दास कहाओ। ताकी शपथ विलम्ब न लाओ।।
जय जय जय ध्वनि होत अकाशा। सुमिरत होत सुसह दुःख नाशा।।
उठु-उठु चल तोहि राम दुहाई। पाँय परौं कर जोरि मनाई।।
ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनु हनुमंता।।
ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल।।
अपने जन को कस न उबारौ। सुमिरत होत आनन्द हमारौ।।
ताते विनती करौं पुकारी। हरहु सकल दुःख विपति हमारी।।
ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा। कस न हरहु दुःख संकट मोरा।।
हे बजरंग, बाण सम धावौ। मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ।।
हे कपिराज काज कब ऐहौ। अवसर चूकि अन्त पछतैहौ।।
जन की लाज जात ऐहि बारा। धावहु हे कपि पवन कुमारा।।
जयति जयति जै जै हनुमाना। जयति जयति गुण ज्ञान निधाना।।
जयति जयति जै जै कपिराई। जयति जयति जै जै सुखदाई।।
जयति जयति जै राम पियारे। जयति जयति जै सिया दुलारे।।
जयति जयति मुद मंगलदाता। जयति जयति त्रिभुवन विख्याता।।
ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा। पावत पार नहीं लवलेषा।।
राम रूप सर्वत्र समाना। देखत रहत सदा हर्षाना।।
विधि शारदा सहित दिनराती। गावत कपि के गुन बहु भाँति।।
तुम सम नहीं जगत बलवाना। करि विचार देखउं विधि नाना।।
यह जिय जानि शरण तब आई। ताते विनय करौं चित लाई।।
सुनि कपि आरत वचन हमारे। मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे।।
एहि प्रकार विनती कपि केरी। जो जन करै लहै सुख ढेरी।।
याके पढ़त वीर हनुमाना। धावत बाण तुल्य बनवाना।।
मेटत आए दुःख क्षण माहिं। दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं।।
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।
डीठ, मूठ, टोनादिक नासै। परकृत यंत्र मंत्र नहीं त्रासे।।
भैरवादि सुर करै मिताई। आयुस मानि करै सेवकाई।।
प्रण कर पाठ करें मन लाई। अल्प-मृत्यु ग्रह दोष नसाई।।
आवृत ग्यारह प्रतिदिन जापै। ताकी छाँह काल नहिं चापै।।
दै गूगुल की धूप हमेशा। करै पाठ तन मिटै कलेषा।।
यह बजरंग बाण जेहि मारे। ताहि कहौ फिर कौन उबारे।।
शत्रु समूह मिटै सब आपै। देखत ताहि सुरासुर काँपै।।
तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई। रहै सदा कपिराज सहाई।।
दोहा
प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान।।
तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।।




जय श्री राम 

श्री राम चरित मानस द्वारा सुखी जीवन बनाएं......

गोस्वामी श्री तुलसी दास जी ने सभी प्राणियों के सुख के लिए श्री राम चरित मानस की रचना की उसमें प्रत्येक चौपाई, दोहा, सोरठा और छंद आदि सभी मंत्रो का सिद्ध रूप ही है. इसका अनुष्ठान कर लाभ प्राप्त किया जा सकता  है.


मानस के दोहे-चौपाईयों को सिद्ध करने का विधान यह है कि किसी भी शुभ दिन की रात्रि को दस बजे के बाद अष्टांग हवन के द्वारा मन्त्र सिद्ध करना चाहिये। फिर जिस कार्य के लिये मन्त्र-जप की आवश्यकता हो, उसके लिये नित्य जप करना चाहिये। 

वाराणसी में भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मन्त्र-शक्ति प्रदान की है- इसलिये वाराणसी की ओर मुख करके शंकरजी को साक्षी बनाकर श्रद्धा से जप करना चाहिये।

अष्टांग हवन सामग्री
१॰ चन्दन का बुरादा, २॰ तिल, ३॰ शुद्ध घी, ४॰ चीनी, ५॰ अगर, ६॰ तगर, ७॰ कपूर, ८॰ शुद्ध केसर, ९॰ नागरमोथा, १०॰ पञ्चमेवा, ११॰ जौ और १२॰ चावल।

जानने की बातें-

जिस उद्देश्य के लिये जो चौपाई, दोहा या सोरठा जप करना बताया गया है, उसको सिद्ध करने के लिये एक दिन हवन की सामग्री से उसके द्वारा (चौपाई, दोहा या सोरठा) १०८ बार हवन करना चाहिये। यह हवन केवल एक दिन करना है। मामूली शुद्ध मिट्टी की वेदी बनाकर उस पर अग्नि रखकर उसमें आहुति दे देनी चाहिये। प्रत्येक आहुति में चौपाई आदि के अन्त में ‘स्वाहा’ बोल देना चाहिये।

प्रत्येक आहुति लगभग पौन तोले की (सब चीजें मिलाकर) होनी चाहिये। इस हिसाब से १०८ आहुति के लिये एक सेर (८० तोला) सामग्री बना लेनी चाहिये। कोई चीज कम-ज्यादा हो तो कोई आपत्ति नहीं। पञ्चमेवा में पिश्ता, बादाम, किशमिश (द्राक्षा), अखरोट और काजू ले सकते हैं। इनमें से कोई चीज न मिले तो उसके बदले नौजा या मिश्री मिला सकते हैं। केसर शुद्ध ४ आने भर ही डालने से काम चल जायेगा।



हवन करते समय माला रखने की आवश्यकता १०८ की संख्या गिनने के लिये है। बैठने के लिये आसन ऊन का या कुश का होना चाहिये। सूती कपड़े का हो तो वह धोया हुआ पवित्र होना चाहिये।

मन्त्र सिद्ध करने के लिये यदि लंकाकाण्ड की चौपाई या दोहा हो तो उसे शनिवार को हवन करके करना चाहिये। दूसरे काण्डों के चौपाई-दोहे किसी भी दिन हवन करके सिद्ध किये जा सकते हैं।

सिद्ध की हुई रक्षा-रेखा की चौपाई एक बार बोलकर जहाँ बैठे हों, वहाँ अपने आसन के चारों ओर चौकोर रेखा जल या कोयले से खींच लेनी चाहिये। फिर उस चौपाई को भी ऊपर लिखे अनुसार १०८ आहुतियाँ देकर सिद्ध करना चाहिये। रक्षा-रेखा न भी खींची जाये तो भी आपत्ति नहीं है। दूसरे काम के लिये दूसरा मन्त्र सिद्ध करना हो तो उसके लिये अलग हवन करके करना होगा।

एक दिन हवन करने से वह मन्त्र सिद्ध हो गया। इसके बाद जब तक कार्य सफल न हो, तब तक उस मन्त्र (चौपाई, दोहा) आदि का प्रतिदिन कम-से-कम १०८ बार प्रातःकाल या रात्रि को, जब सुविधा हो, जप करते रहना चाहिये।

कोई दो-तीन कार्यों के लिये दो-तीन चौपाइयों का अनुष्ठान एक साथ करना चाहें तो कर सकते हैं। पर उन चौपाइयों को पहले अलग-अलग हवन करके सिद्ध कर लेना चाहिये।



१॰ विपत्ति-नाश के लिये
“राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।।”

२॰ संकट-नाश के लिये

“जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।।
जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।।
दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।”

३॰ कठिन क्लेश नाश के लिये

“हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसू॥”

४॰ विघ्न शांति के लिये

“सकल विघ्न व्यापहिं नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही॥”


५॰ खेद नाश के लिये

“जब तें राम ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए॥”


६॰ चिन्ता की समाप्ति के लिये

“जय रघुवंश बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृशानू॥”


७॰ विविध रोगों तथा उपद्रवों की शान्ति के लिये

“दैहिक दैविक भौतिक तापा।राम राज काहूहिं नहि ब्यापा॥”


८॰ मस्तिष्क की पीड़ा दूर करने के लिये

“हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।।”


९॰ विष नाश के लिये

“नाम प्रभाउ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को।।”


१०॰ अकाल मृत्यु निवारण के लिये

“नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।
लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।।”


११॰ सभी तरह की आपत्ति के विनाश के लिये / भूत भगाने के लिये

“प्रनवउँ पवन कुमार,खल बन पावक ग्यान घन।
जासु ह्रदयँ आगार, बसहिं राम सर चाप धर॥”


१२॰ नजर झाड़ने के लिये

“स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।”


१३॰ खोयी हुई वस्तु पुनः प्राप्त करने के लिए

“गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।”


१४॰ जीविका प्राप्ति केलिये

“बिस्व भरण पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत जस होई।।”


१५॰ दरिद्रता मिटाने के लिये

“अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद धन दारिद दवारि के।।”


१६॰ लक्ष्मी प्राप्ति के लिये

“जिमि सरिता सागर महुँ जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।
तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।”


१७॰ पुत्र प्राप्ति के लिये

“प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।’


१८॰ सम्पत्ति की प्राप्ति के लिये

“जे सकाम नर सुनहि जे गावहि।सुख संपत्ति नाना विधि पावहि।।”


१९॰ ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त करने के लिये

“साधक नाम जपहिं लय लाएँ। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएँ।।”


२०॰ सर्व-सुख-प्राप्ति के लिये

सुनहिं बिमुक्त बिरत अरु बिषई। लहहिं भगति गति संपति नई।।


२१॰ मनोरथ-सिद्धि के लिये

“भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि।
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि।।”


२२॰ कुशल-क्षेम के लिये

“भुवन चारिदस भरा उछाहू। जनकसुता रघुबीर बिआहू।।”


२३॰ मुकदमा जीतने के लिये

“पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।”


२४॰ शत्रु के सामने जाने के लिये

“कर सारंग साजि कटि भाथा। अरिदल दलन चले रघुनाथा॥”


२५॰ शत्रु को मित्र बनाने के लिये

“गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।।”


२६॰ शत्रुतानाश के लिये

“बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप विषमता खोई॥”


२७॰ वार्तालाप में सफ़लता के लिये

“तेहि अवसर सुनि सिव धनु भंगा। आयउ भृगुकुल कमल पतंगा॥”


२८॰ विवाह के लिये

“तब जनक पाइ वशिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै।
मांडवी श्रुतकीरति उरमिला, कुँअरि लई हँकारि कै॥”


२९॰ यात्रा सफ़ल होने के लिये

“प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। ह्रदयँ राखि कोसलपुर राजा॥”


३०॰ परीक्षा / शिक्षा की सफ़लता के लिये

“जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी॥
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥”


३१॰ आकर्षण के लिये

“जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू॥”


३२॰ स्नान से पुण्य-लाभ के लिये

“सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग।
लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग।।”


३३॰ निन्दा की निवृत्ति के लिये

“राम कृपाँ अवरेब सुधारी। बिबुध धारि भइ गुनद गोहारी।।


३४॰ विद्या प्राप्ति के लिये

गुरु गृहँ गए पढ़न रघुराई। अलप काल विद्या सब आई॥


३५॰ उत्सव होने के लिये

“सिय रघुबीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं।
तिन्ह कहुँ सदा उछाहु मंगलायतन राम जसु।।”


३६॰ यज्ञोपवीत धारण करके उसे सुरक्षित रखने के लिये

“जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग।
पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग।।”


३७॰ प्रेम बढाने के लिये

"सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥


३८॰ कातर की रक्षा के लिये

“मोरें हित हरि सम नहिं कोऊ। एहिं अवसर सहाय सोइ होऊ।।”


३९॰ भगवत्स्मरण करते हुए आराम से मरने के लिये

रामचरन दृढ प्रीति करि बालि कीन्ह तनु त्याग । 
सुमन माल जिमि कंठ तें गिरत न जानइ नाग ॥


४०॰ विचार शुद्ध करने के लिये

“ताके जुग पद कमल मनाउँ। जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ।।”


४१॰ संशय-निवृत्ति के लिये

“राम कथा सुंदर करतारी। संसय बिहग उड़ावनिहारी।।”


४२॰ ईश्वर से अपराध क्षमा कराने के लिये

"अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमा मंदिर दोउ भ्राता।।”


४३॰ विरक्ति के लिये

“भरत चरित करि नेमु तुलसी जे सादर सुनहिं।
सीय राम पद प्रेमु अवसि होइ भव रस बिरति।।”


४४॰ ज्ञान-प्राप्ति के लिये

“छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीरा।।”


४५॰ भक्ति की प्राप्ति के लिये

“भगत कल्पतरु प्रनत हित कृपासिंधु सुखधाम।
सोइ निज भगति मोहि प्रभु देहु दया करि राम।।”


४६॰ श्रीहनुमान् जी को प्रसन्न करने के लिये

“सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपनें बस करि राखे रामू।।”


४७॰ मोक्ष-प्राप्ति के लिये

“सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। काल सर्प जनु चले सपच्छा।।”


४८॰ श्री सीताराम के दर्शन के लिये

“नील सरोरुह नील मनि नील नीलधर श्याम । 
लाजहि तन सोभा निरखि कोटि कोटि सत काम ॥”


४९॰ श्रीजानकीजी के दर्शन के लिये

“जनकसुता जगजननि जानकी। अतिसय प्रिय करुनानिधान की।।”


५०॰ श्रीरामचन्द्रजी को वश में करने के लिये

“केहरि कटि पट पीतधर सुषमा सील निधान।
देखि भानुकुल भूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।।”


५१॰ सहज स्वरुप दर्शन के लिये

“भगत बछल प्रभु कृपा निधाना। बिस्वबास प्रगटे भगवाना।।”



(कल्याण  तथा गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस से साभार उद्धृत)


जय श्री राम.....

Thursday, May 19, 2016

भगवान गणेश जी द्वारा जीवन की(Remove Life Problems)समस्याएं दूर करें.



यदि आप  और आपका परिवार सुखी और समृद्ध होना चाहता हैं तो भगवान गणेश जी की पूजा अनिवार्य है..


आज के युग में परिवार में सुख समृद्धि प्राप्त करना बहुत कठिन सा प्रतीत होता है, परिवार  में तीन प्रकार की समस्याएं बहुत अधिक देखने को मिलती है, अगर हम कहें कि यही तीन समस्या ना हों तो सब कुछ सही है. यही तीन समस्याएं परिवार में रीड अर्थात मेरुदंड के समान है. सबसे अधिक इन्ही समस्याओं से मनुष्य परेशान रहता है.


ये तीन समस्याएं  स्वास्थ्य, आपसी वैचारिकता और धन आगमन के संसाधन की समस्या इन्ही के कारण परिवार अधिक परेशान रहता है, कई बार इन्ही समस्याओं के कारण परिवार में बिखराव की स्थिति भी बनने लगती है. इन तीन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए भगवान गणपति जी की आराधना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होती है, और एक आदर्श और सुखी स्वस्थ्य तथा धनवान परिवार के लिए ये उपासना अत्यंत जरुरी है.



पति पत्नी दोनों मिलकर ये उपासना करें तो शीघ्र फल मिलने लगता है.तथा भगवान गणेश जी परिवार की सभी परकार की समस्या दूर करने में आपकी सहायता करते है.

सबसे पहले भगवान गणेश जी की मूर्ति अथवा चित्र जिसमें दक्षिण की तरफ  सूंढ़ हो उसे शुक्ल पक्ष की चतुर्थी वाले दिन खरीदकर घर लायें, मूर्ति किसी धातु या मिट्टी की होनी चाहिए, मूर्ति खरीदने से पहले उस मूर्ति को पूर्व दिशा की तरफ कर के देखें यदि सूंढ़ दक्षिण दिशा की तरफ मुड़ी हुयी हो तो उसे ही खरीदें. 

भगवान गणेश जी को प्रति दिन चंदन का तिलक सभी परिवार के सदस्यों द्वारा करवाना चाहिए,आप चन्दन, गूगल और कपूर मिला कर धूप  की तरह सामने जलाएं धुआं होना अत्यंत आवश्यक है इनके समक्ष सामने पानी ताम्बे के लौटे में रखें, शाम के समय वही जल पूरे घर में किसी भी पीले रंग के फूल द्वारा छिडकाव करें शेष जल किसी फूल या फल वाले पेड़ पर चढ़ा दें. ऐसा रोज़ करें..

"ॐ  गं गणपतये नमः"  इस मंत्र का जाप परिवार के सभी सदस्य करें तो सभी सुख मिलते है.

भगवान गणेश जी की पूजा करने से मंगल, बुध, वृहस्पति, और केतु  जल्दी शांत हो कर अपना शुभ प्रभाव देने लगते है.

शरीर के षट चक्रों के अनुसार भगवान गणेश जी मूलाधार चक्र के स्वामी है जिसके कारण इनकी पूजा करने से सूर्य चंद्रमा भी शुभ फल देने लगते है.

यदि समस्या बहुत अधिक हो रही है या संकट बढ़ गया है तो श्री गणेश अथर्वशीर्ष  का पाठ अत्यंत लाभ कारी होता है, इस  श्री गणेश अथर्वशीर्ष के पाठ से असंभव से असंभव समस्या भी तुरंत दूर होने लगती है.


नित्य भगवान गणपति की आराधना करने वाला परिवार सदैव सुखी और सम्पन्न रहता है....





शुभमस्तु !!


Wednesday, May 18, 2016

क्या आपका दोस्त (Friends)आपको धोखा दे रहा है....

"जीवन में साथ चलने वाले तो कई लोग मिलते हैं लेकिन जो व्यक्ति अपने कदमों के निशान आपके ह्रदय में दूर-दूर तक छोड़ जाए" मेरे अनुसार वही है आपका सच्चा  दोस्त / मित्र है.......

मित्र एक ऐसा शब्द है, जिस की परिभाषा अलग अलग रूप में सभी व्यक्ति देते है.ये प्रश्न आज भी वहीँ उसी जगह खड़ा है जहाँ पहले था कि "सच्चा मित्र कौन" ? इस प्रश्न का उत्तर किसी के पास नही है और भवष्य में शायद इसका उत्तर मिलेगा भी नही,  क्योंकि मित्र नामक शब्द को बदलने में देर नही लगती है इतिहास गवाह है कि आज तक 99%  शत्रु कभी पैदा ही नही हुए शत्रु नामक शब्द मित्र का विलोम रूप है सही भी है, और तर्क संगत भी है की शत्रु वो ही बनता है जो पहले कभी मित्र था. अतः मित्रता को शत्रुता में बदलने में टाइम नही लगता इसके पीछे स्वार्थ ही सबसे बड़ा कारण है, 

व्यक्ति के बहुत से मित्र समाज में होते है, कोई मित्र सुबह शाम नमस्कार करने वाले तो कोई मित्र स्टाफ के रूप में तथा कोई मित्र यात्रा आदि में अचानक बनने वाले और बहुत से मित्र तो विद्यार्थी जीवन में बन जाते है यही मित्र कुछ अच्छे संस्कार वाले होते है तथा इनमें से कुछ मित्र बुरे संस्कार वाले मिलते है, इसी विद्यार्थी जीवन में एक सच्चे मित्र की पहचान करना बहुत मुश्किल ही नही लगभग असंभव कार्य है,क्या होते हैं दोस्त: बदलते समय के साथ दोस्ती की परिभाषा भी बदलती जा रही है. पहले कहा जाता था, कि एक लडका और लडकी अच्छे दोस्त नहीं हो सकते, लेकिन आधुनिक समय में लडके व लडकियां साथ पढ रहें हैं और अच्छी और पवित्र दोस्ती भी निभा रहे हैं..

जिंदगी दोस्ती के बिना अधूरी है, इसलिए दोस्ती में एक सच्चा दोस्त होना बहुत ही जरूरी है, लेकिन कई बार कुछ ऎसे दोस्त भी निकल जाते हैं जो दोस्ती में धोखा देकर इस रिश्ते को ही बदनाम कर देते हैं. इसलिए एक अच्छे दोस्त का चुनाव बहुत सोच समझकर ही करना चाहिए.

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जीवन में एक मित्र खुशियों की बहार ला सकता है साथ ही एक मित्र जीवन को बर्बाद भी करने में सक्षम हो सकता है, दोस्त सबसे पहले आपके दिमाग और दिल पर कब्जा करते है फिर उसके बाद अपनी उँगलियों पर नचाते है, फलस्वरूप उस समय अपने अच्छे और बुरे को पहचानने की शक्ति भी काम नही करती है, ऐसा आयु के 18 - 25  वर्ष के मध्य धटित होता है.यही वो टाइम है जब व्यक्ति का कैरियर बनने लगता है, भारतीय ज्योतिष के अनुसार बुरे मित्र से मिलवाने का काम राहू के कारण संभव होता है, जिसकी जन्म कुंडली में राहू भाग्य या लाभ भाव को अशुभ दृष्टि से देख रहा हो तो उसके जीवन में बुरे मित्रों की कमी नही रहेगी, अर्थात वो व्यक्ति कभी अच्छे मार्ग पर नही चल सकता है.


आजकल युवक युवतिया कोर्स या जॉब करने के लिए माता पिता से दूर किसी अन्य शहर में होस्टल या पी जी आदि में रहते है उनके लिए ये 25 - 28  वर्ष तक की आयु बहुत गंभीर रहती है इसी  आयु में प्रेम सम्बन्ध आदि होने के कारण देखने में आया है, गलत मित्र से भेंट हो जाने से जीवन नरक तुल्य हो जाता है सावधानी रखें. इसलिए अभिभावक माता पिता को उन पर नजर रखनी चाहिए तथा साथ ही अपने विद्वान ज्योतिषी से सलाह कर के उनकी कुंडली में राहू का आकलन करवा कर उसका उपचार अनिवार्य रूप से करवाएं तभी इस अशुभ मित्रों के दोष से बचा जा सकेगा,

इस से अपने बच्चों या स्वंम को बचाने के लिए या कोई मित्र आपको धोखा दे रहा है, धोखा चाहे आर्थिक हो या मानसिक हो या शारीरिक रूप से आपको पीड़ित कर रहा हो तो निम्न सिद्ध उपाय कर आप लाभ उठा सकते है.

जन्म कुंडली स्थित पापी ग्रहों का जाप तथा दान आदि कर शांत करवाएं.

विशेष कर राहू का उपचार ज्यादा अनिवार्य है.

प्रत्येक सोमवार गेंहूँ का दान अपनी श्रद्धा अनुसार मंदिर में जा कर करें तो भी लाभ होगा.

पपीता फल के 7 सूखे बीज लेकर काले कपड़ें में छोटी से पोटली ताबीज के साइज़ की बना कर गले में काले धागे में बाँध कर शनिवार धारण करें, इस के करने से उस मित्र के प्रति मन उचाट होने लगेगा,

अपनी जेब में एक मोर का पंख अवश्य रखें. तथा अपने बिस्तर के दांये तरफ 16 मोर के पंख का गुलदस्ता बना कर रखने से बुरे मित्र साथ छोड़ जाते है 



शुभमस्तु !!

पति-पत्नी(Husband-Wife) के मध्य संघर्ष कैसे दूर करें.........

गृहस्थ जीवन का मुख्य आधार पति और पत्नी का आपसी विशवास.....

वैवाहिक जीवन तभी तक सुखमय बना रहता है जब तक पति-पत्नी का विशवास बना रहता है, जिस समय भी आपसी विश्वास कमजोर हुआ तो उसी समय से  गृहस्थ जीवन के सुख में दरार आणि शुरू हो जायेगी, जिसके कारण एक छोटी सी मामूली बात भी भयंकर रूप ले लेती है तथा उसके कारण एक स्वीट होम अर्थात आदर्श परिवार खंडित हो कर बिखरने लगता है.

कभी कभी जन्म कुंडली का मिलान सही से नही हो पाटा है, देखने में आया है की आजकल बहुत से लोग अपने विद्वान पंडित जी या ज्योतिषी से जाने से पहले अपने आप अपने लैपटॉप पर कुंडली मिलान कर लेते है और अपनी पसंद से विवाह करने को तैयार हो जाते है, यदि विवाह उपरान्त कोई अनहोनी हो जाती है तो सारा  दोष ज्योतिष के ऊपर डाल दिया जाता है.

जन्मकुंडली मिलान करते समय गुण देख कर ही निर्णय नही करना चाहिए जैसा की आजकल बहुत से लोग स्वतः ये काम कर लेते है, गुण से अधिक उन दोनों के ग्रह योग का भली भाँती से मिलान करना चाहियें तथा किसी विद्वान ज्योतिषी से इस विषय पर मार्गदर्शन अवश्य लें तभी विवाह का निर्णय करें. जल्दबाजी और शीघ्रता से कोई फैसला ना लें क्योंकि इसमें दोनों के जीवन का लक्ष्य और सुख छिपा हुआ रहता है.

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यदि इस प्रकार का संघर्ष पति पत्नी में होता है तो वह सबसे पहले किसी विद्वान पंडित जी से संपर्क कर दोनों जन्मकुंडलियों का सही मिलान करवा कर जो भी उसमें दोष बनता है उसका सही रूप से उपचार करवाएं तो भी लाभ होगा.

भारतीय ज्योतिष अनुसार वैवाहिक जीवन में सूर्य, मंगल, शनि और राहू द्वारा ही सबसे अधिक समस्या आती है.इन्ही ग्रहों के दूषित या सातवें भाव को अशुभ
दृष्टि से देखने के कारण वैवाहिक जीवन में बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, इस लिए इनका उपाय अनिवार्यतः करवाने कौशिश करें. जिस से लाभ हो. इसके अलावा कुछ उपाय ऐसे है जिसे आप पहले कर के बहुत सी समस्याओं को दूर कर सकते हो, जिसका वर्णन लिख रहा हूँ.

आप अपने घर में तुलसी के 5 पौधे रखें इसके रखने से .सूर्य की हानिकर प्रभाव कम हो जाता है. आप रविवार को बहते पानी में सवा पाँव गुड़ प्रवाह करें .आप तुलसी माला के साथ गायत्री मंत्र का जाप करें. घर में कभी भी टूटे फटे जूते चप्पल आदि संभाल कर ना रखें इनको तुरंत बाहर फेंक दें,आप चींटियों को पल्स (गेहूं, मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा, चावल, लाल मसूर दाल या  काले उड़द)  सात प्रकार के अनाज का आटा पिसवा कर खिला सकते हैं. आप चांदी का सिक्का  एक दूसरे के जन्मदिन पर उपहार में दें तथा एक दुसरे के जन्म दिन पर चावल का पुलाव बना कर अवश्य खाएं, जल्दी लाभ होगा.


दक्षिण दिशा में प्रवेश द्वार या घर के मुख्य द्वार न रखें.इस से समस्या बढती है स्टोव रसोई घर में दक्षिण-पूर्व की ओर होना जरुरी है.

उत्तर पूर्व दिशा की ओर अपने बेडरूम  न रखें. यह दिशा पूजा के लिए बहुत लाभदायक है. इसके अलावा दक्षिण-पूर्व की ओर में अपने बेडरूम रखने से बचें. बेडरूम दक्षिण-पश्चिम की ओर होना चाहिए. हमेशा  दक्षिण की ओर अपने सिर रखो.  अपनी छत पर चीनी या गुड़ रखें.  

इस प्रकार से उपाय कर सावधानी रखने से वैवाहिक जीवन में पुनः खुशियाँ वापिस आ जाती है.....




शुभमस्तु !!


ड्रेस(Dress) द्वारा समस्या दूर करें.......

नित्य पहनने वाले कपड़ें भी आपकी समस्या को काफी हद तक दूर करने में सहायक हो जाती है, 

हर समस्या का एक समाधान भी होता है, कपड़ें का रंग अलग अलग समस्या को सुलझाने में सहायता प्रदान करता है.प्रत्येक रंग अपना एक गुण रखता है, रंगों के चयन से उस व्यक्ति का स्वभाव, गुण तथा उस की आदतें व् उसके शुभ अशुभ विचार धारा को पहचाना जा सकता है. उसी प्रकार मनुष्य को जो भी समस्या हो उसी के अनुरूप ऐसे रंगों के कपड़ों का चयन किया जाता है की वह समस्या काफी आसान होकर दूर हो सके.

रंग और कपड़ों का मिलान आज के युग में बहुत प्रभावशाली सिद्ध होता है ऐसा कई बार अनुभव में  भी आ चुका है, शरीर के ऊपरी हिस्सों में पहनने वाले कपडें ज्यादा महत्वपूर्ण होते है तथा उनका असर भी बहुत जल्दी होता देखा गया है.नीचे भाग के पहनने वाले कपड़ें कम फल देते है या देर से उनका फल मिलता है.आज इसी सन्दर्भ में रंग और कपड़ों के मिलान से समस्याओं के अनुसार उपाय लिख रहा हूँ.

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ड्रेस का हमारे जीवन में अत्यंत योगदान रहा है इसी ड्रेस के द्वारा हम किसी विशेष  व्यक्ति को पहचान लेते है जैसे चिकित्सा क्षेत्र में सफेद रंग का महत्व है डोक्टर, नर्स आदि स्टाफ यहाँ तक की हॉस्पिटल के कमरे दरवाजों पर भी सफेद रंग बहुत अधिक मिलता है, पुलिस आदि का भी खाकी रंग तथा रक्षा क्षेत्र में भी इन्ही रंगों से चिन्हित किया गया है, 

रंग हमारे जीवन एक मुख्या आधार बन चुका है रंगों के बिना ये जीवन अन्धकारमय बन जाता है, अतः हमारी समस्याएं भी काफी हद तक इन्हीं रंगों के उपयोग से दूर हो सकती है या उन समस्याओं से राहत मिलने लगती है.

विवाह ..... 

भारतीय ज्योतिष अनुसार पुरुष के विवाह में शुक्र ग्रह का योगदान रह्ता है, तथा महिला की जन्म कुंडली अनुसार वृहस्पति का विवाह में योगदान रहता है अतः शुक्र तथा वृहस्पति के रंगों का संयोजन विवाह में करना चाहिए, इसके लिए महिलाओं को चमकदार और सुंदर गुलाबी, लाल और पीले रंग का मिलान कर ही अपने कपड़ें पहनने चाहिए तथ पुरुष को हलके रंग के कपड़ें सबसे अधिक क्रीम रंग तथा सफेद चमकदार रंग के  कपड़ें शास्त्र में भी उल्लेखित है, इनसे भावी वैवाहिक जीवन  सुखमय व्यतीत होता है.

नौकरी...

नौकरी में अपने क्षेत्र अनुसार कपड़ें पहने जाते है,आप हल्के हरे, ग्रे, क्रीम, कॉरपोरेट सेक्टर में हल्के पीले रंग की टी-शर्ट पहन सकते हैं.आप प्रशासनिक सेवाओं में हल्के नीले या सफेद रंग के कपड़े पहन सकते हैं.आप इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम नीले रंग के कपड़े पहन सकते हैं. एक मीडिया या ग्लैमर से संबंधित काम में चमकदार सफेद या हल्के गुलाबी रंग के कपड़े पहन सकते हैं. एक किसी भी साक्षात्कार में काले या भूरे रंग के कपड़ें धारण कर लाभ उठा सकते है. जब भी विपरीत रंग के कपड़ें पहन कर ऑफिस लागातार जाओ तो कोई ना कोई समस्या अवश्य होने लगती है कई बार नौकरी से सस्पेंड या नौकरी छोड़ने की भी स्थिति बन जाती है अतः अपने कपड़ों पर अधिक ध्यान दें एक ड्रेस बना कर ही पहने, लाभ होगा.

मुकद्दमेबाजी...

कोर्ट में ग्रे रंग के कपड़े पहन कार जाए तो लाभ होगा, विवाह से संबंधित मुकदमेबाजी के लिए जाते समय नीले या काले रंग के कपड़े धारण करने से मुकद्दमा अधिक देर तक नही चलता जल्दी ही उसका निर्णय आपके पक्ष में होने लगता है,संपत्ति संबंधित मुकदमेबाजी के लिए जाने के लिए सफेद रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए  इस से कोर्ट का फैसला आपके पक्ष में होना आरम्भ हो जाएगा. आपराधिक मामले के लिए सफेद तथा नीले रंग के कपड़ों का उपयोग लाभप्रद रहेगा, 

मेडिकल...

यदि आप रोगों से जल्दी छुटकारा पाना चाहते है, शनि और बुध ग्रह में रोगों से लड़ने की क्षमता है, शनि आपको बीमारी के बाद लंबे समय के लिए स्वस्थ रहता है. आप मेडिकल जांच के लिए जाते समय हरे रंग का कपड़ा धारण करें या हरे रंग का रुमाल अपने पास रख कर जाएँ लाभ मिलेगा, अगर आप सर्जरी के लिए जा रहे हैं तो लाल रंग का कपड़ा या रुमाल प्रयोग करें, इस प्रकार से रंग और कपड़ों के मिलान से अनावश्यक खर्च नही होगा तथा बिमारी लम्बे समय तक नही चलेगी जल्दी ही कंट्रोल हो कर आपको स्वस्थ बना देगी.

इसी प्रकार दुसरे क्षेत्रो का वर्णन आगे लेखों में लिखने की कौशिश करूँगा........ 


शुभमस्तु !!

Tuesday, May 17, 2016

सरकारी नौकरी (Govt Job.)का योग.....

आपकी जन्म-कुंडली में सरकारी नौकरी के योग है...या नही ? 

व्यक्ति अपने जॉब के प्रति ज्यादा चिंतित रहता है, और आज के युग में तो सरकारी जॉब एक लाटरी से कम नही है.सरकारी जॉब मिलते ही इस प्रकार ख़ुशी होती है जैसे कोई लाटरी निकल आई हो, इसीलिए हर किसी का यही एक सपना होता है की मेरी सरकारी जॉब हो तथा उसके लिए वो प्रयत्न भी बहुत करता है.  

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में जन्म कुंडली का बहुत महत्व होता है चाहे कोई छोटी या बड़ी समस्याओं के लिए कुंडली के ग्रहों का बहुत बड़ा हाथ होता है. जन्म कुंडली में जिस प्रकार का ग्रह शक्तिशाली होता है उसी प्रकार के परिणाम भी व्यक्ति को प्राप्त होते हैं. कई बार ऐसा होता है कि अथक मेहनत और परिश्रम के बाद भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी प्राप्ति में सफलता नहीं मिल रही होती है. 

सरकारी नौकरी का निर्धारण व्यक्ति की योग्यता, शिक्षा, अनुभव के साथ-साथ उसकी जन्म कुंडली अनुसार ग्रह योगों के कारण भी होता है.आज उसी हर्कारी जॉब के विषय में बताते है की वह कौन से ग्रह योग होते हैं जो सरकारी नौकरी प्राप्ति में मदद करते हैं.

सरकारी जॉब प्राप्त करने के लिए जन्म कुंडली में निम्न योगों का होना अनिवार्य व् शुभ माना जाता है.

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जन्म-कुंडली में दशम स्थान को (दसवां स्थान) को तथा छठे भाव को जॉब आदि के लिए जाना जाता है.सरकारी नौकरी के योग को देखने के लिए इसी घर का आंकलन किया जाता है। दशम स्थान में अगर सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति की दृष्टि पड़ रही होती है साथ ही उनका सम्बन्ध छठे भाव से हो तो सरकारी नौकरी का प्रबल योग बन जाता है.


कभी-कभी यह भी देखने में आता है कि जातक की कुंडली में दशम में तो यह ग्रह होते हैं लेकिन फिर भी जातक को संघर्ष करना पड़ रहा होता है तो ऐसे में अगर सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति पर किसी पाप ग्रह (अशुभ ग्रह) की दृष्टि पड़ रही होती है तब जातक को सरकारी नौकरी प्राप्ति में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अतः यह जरूरी है कि आपके यह ग्रह पाप ग्रहों से बचे हुए रहें..


जन्म कुंडली में यदि जातक का लग्न मेष, मिथुन, सिंह, वृश्चिक, वृष या तुला है तो ऐसे में शनि ग्रह और गुरु (वृहस्पति) का एक-दूसरे से केंद्र या त्रिकोण में होना, सरकारी नौकरी के लिए अच्छा योग उत्पन्न करते हैं..


जन्म कुंडली में यदि केंद्र में अगर चन्द्रमा, ब्रहस्पति एक साथ होते हैं तो उस स्थिति में भी सरकारी नौकरी के लिए अच्छे योग बन जाते हैं। साथ ही साथ इसी तरह चन्द्रमा और मंगल भी अगर केन्द्रस्थ हैं तो सरकारी नौकरी की संभावनायें बढ़ जाती हैं..


कुंडली में दसवें घर के बलवान होने से तथा इस घर पर एक या एक से अधिक शुभ ग्रहों का प्रभाव होने से जातक को अपने करियर क्षेत्र में बड़ी सफलताएं मिलतीं हैं तथा इस घर पर एक या एक से अधिक बुरे ग्रहों का प्रभाव होने से कुंडली धारक को आम तौर पर अपने करियर क्षेत्र में अधिक सफलता नहीं मिल पाती है..

ज्योतिष के अन्दर इस तरह की समस्या के लिए उपयुक्त उपचार भी मौजूद हैं। जातक की कुंडली का पूरा आंकलन करने के बाद ही उपायों को सुझाया जा सकता है.. 

जो शुभ ग्रह कमजोर हैं उन्हें बलवान बनाकर और अशुभ ग्रहों को शांत कर, इस तरह की समस्याओं का अंत किया जा सकता है...

आपकी जन्म कुंडली में ऐसे योग की स्थिति किस परकार से है तो अपने निकट के विद्वान ज्योतिषी से संपर्क करें....

इससे उचित मार्गदर्शन मिलेगा.....


शुभमस्तु !!