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Thursday, May 19, 2016

भगवान गणेश जी द्वारा जीवन की(Remove Life Problems)समस्याएं दूर करें.



यदि आप  और आपका परिवार सुखी और समृद्ध होना चाहता हैं तो भगवान गणेश जी की पूजा अनिवार्य है..


आज के युग में परिवार में सुख समृद्धि प्राप्त करना बहुत कठिन सा प्रतीत होता है, परिवार  में तीन प्रकार की समस्याएं बहुत अधिक देखने को मिलती है, अगर हम कहें कि यही तीन समस्या ना हों तो सब कुछ सही है. यही तीन समस्याएं परिवार में रीड अर्थात मेरुदंड के समान है. सबसे अधिक इन्ही समस्याओं से मनुष्य परेशान रहता है.


ये तीन समस्याएं  स्वास्थ्य, आपसी वैचारिकता और धन आगमन के संसाधन की समस्या इन्ही के कारण परिवार अधिक परेशान रहता है, कई बार इन्ही समस्याओं के कारण परिवार में बिखराव की स्थिति भी बनने लगती है. इन तीन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए भगवान गणपति जी की आराधना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होती है, और एक आदर्श और सुखी स्वस्थ्य तथा धनवान परिवार के लिए ये उपासना अत्यंत जरुरी है.



पति पत्नी दोनों मिलकर ये उपासना करें तो शीघ्र फल मिलने लगता है.तथा भगवान गणेश जी परिवार की सभी परकार की समस्या दूर करने में आपकी सहायता करते है.

सबसे पहले भगवान गणेश जी की मूर्ति अथवा चित्र जिसमें दक्षिण की तरफ  सूंढ़ हो उसे शुक्ल पक्ष की चतुर्थी वाले दिन खरीदकर घर लायें, मूर्ति किसी धातु या मिट्टी की होनी चाहिए, मूर्ति खरीदने से पहले उस मूर्ति को पूर्व दिशा की तरफ कर के देखें यदि सूंढ़ दक्षिण दिशा की तरफ मुड़ी हुयी हो तो उसे ही खरीदें. 

भगवान गणेश जी को प्रति दिन चंदन का तिलक सभी परिवार के सदस्यों द्वारा करवाना चाहिए,आप चन्दन, गूगल और कपूर मिला कर धूप  की तरह सामने जलाएं धुआं होना अत्यंत आवश्यक है इनके समक्ष सामने पानी ताम्बे के लौटे में रखें, शाम के समय वही जल पूरे घर में किसी भी पीले रंग के फूल द्वारा छिडकाव करें शेष जल किसी फूल या फल वाले पेड़ पर चढ़ा दें. ऐसा रोज़ करें..

"ॐ  गं गणपतये नमः"  इस मंत्र का जाप परिवार के सभी सदस्य करें तो सभी सुख मिलते है.

भगवान गणेश जी की पूजा करने से मंगल, बुध, वृहस्पति, और केतु  जल्दी शांत हो कर अपना शुभ प्रभाव देने लगते है.

शरीर के षट चक्रों के अनुसार भगवान गणेश जी मूलाधार चक्र के स्वामी है जिसके कारण इनकी पूजा करने से सूर्य चंद्रमा भी शुभ फल देने लगते है.

यदि समस्या बहुत अधिक हो रही है या संकट बढ़ गया है तो श्री गणेश अथर्वशीर्ष  का पाठ अत्यंत लाभ कारी होता है, इस  श्री गणेश अथर्वशीर्ष के पाठ से असंभव से असंभव समस्या भी तुरंत दूर होने लगती है.


नित्य भगवान गणपति की आराधना करने वाला परिवार सदैव सुखी और सम्पन्न रहता है....





शुभमस्तु !!


Wednesday, May 18, 2016

क्या आपका दोस्त (Friends)आपको धोखा दे रहा है....

"जीवन में साथ चलने वाले तो कई लोग मिलते हैं लेकिन जो व्यक्ति अपने कदमों के निशान आपके ह्रदय में दूर-दूर तक छोड़ जाए" मेरे अनुसार वही है आपका सच्चा  दोस्त / मित्र है.......

मित्र एक ऐसा शब्द है, जिस की परिभाषा अलग अलग रूप में सभी व्यक्ति देते है.ये प्रश्न आज भी वहीँ उसी जगह खड़ा है जहाँ पहले था कि "सच्चा मित्र कौन" ? इस प्रश्न का उत्तर किसी के पास नही है और भवष्य में शायद इसका उत्तर मिलेगा भी नही,  क्योंकि मित्र नामक शब्द को बदलने में देर नही लगती है इतिहास गवाह है कि आज तक 99%  शत्रु कभी पैदा ही नही हुए शत्रु नामक शब्द मित्र का विलोम रूप है सही भी है, और तर्क संगत भी है की शत्रु वो ही बनता है जो पहले कभी मित्र था. अतः मित्रता को शत्रुता में बदलने में टाइम नही लगता इसके पीछे स्वार्थ ही सबसे बड़ा कारण है, 

व्यक्ति के बहुत से मित्र समाज में होते है, कोई मित्र सुबह शाम नमस्कार करने वाले तो कोई मित्र स्टाफ के रूप में तथा कोई मित्र यात्रा आदि में अचानक बनने वाले और बहुत से मित्र तो विद्यार्थी जीवन में बन जाते है यही मित्र कुछ अच्छे संस्कार वाले होते है तथा इनमें से कुछ मित्र बुरे संस्कार वाले मिलते है, इसी विद्यार्थी जीवन में एक सच्चे मित्र की पहचान करना बहुत मुश्किल ही नही लगभग असंभव कार्य है,क्या होते हैं दोस्त: बदलते समय के साथ दोस्ती की परिभाषा भी बदलती जा रही है. पहले कहा जाता था, कि एक लडका और लडकी अच्छे दोस्त नहीं हो सकते, लेकिन आधुनिक समय में लडके व लडकियां साथ पढ रहें हैं और अच्छी और पवित्र दोस्ती भी निभा रहे हैं..

जिंदगी दोस्ती के बिना अधूरी है, इसलिए दोस्ती में एक सच्चा दोस्त होना बहुत ही जरूरी है, लेकिन कई बार कुछ ऎसे दोस्त भी निकल जाते हैं जो दोस्ती में धोखा देकर इस रिश्ते को ही बदनाम कर देते हैं. इसलिए एक अच्छे दोस्त का चुनाव बहुत सोच समझकर ही करना चाहिए.

 http://ptanilji.blogspot.com/2016/05/friends.html
जीवन में एक मित्र खुशियों की बहार ला सकता है साथ ही एक मित्र जीवन को बर्बाद भी करने में सक्षम हो सकता है, दोस्त सबसे पहले आपके दिमाग और दिल पर कब्जा करते है फिर उसके बाद अपनी उँगलियों पर नचाते है, फलस्वरूप उस समय अपने अच्छे और बुरे को पहचानने की शक्ति भी काम नही करती है, ऐसा आयु के 18 - 25  वर्ष के मध्य धटित होता है.यही वो टाइम है जब व्यक्ति का कैरियर बनने लगता है, भारतीय ज्योतिष के अनुसार बुरे मित्र से मिलवाने का काम राहू के कारण संभव होता है, जिसकी जन्म कुंडली में राहू भाग्य या लाभ भाव को अशुभ दृष्टि से देख रहा हो तो उसके जीवन में बुरे मित्रों की कमी नही रहेगी, अर्थात वो व्यक्ति कभी अच्छे मार्ग पर नही चल सकता है.


आजकल युवक युवतिया कोर्स या जॉब करने के लिए माता पिता से दूर किसी अन्य शहर में होस्टल या पी जी आदि में रहते है उनके लिए ये 25 - 28  वर्ष तक की आयु बहुत गंभीर रहती है इसी  आयु में प्रेम सम्बन्ध आदि होने के कारण देखने में आया है, गलत मित्र से भेंट हो जाने से जीवन नरक तुल्य हो जाता है सावधानी रखें. इसलिए अभिभावक माता पिता को उन पर नजर रखनी चाहिए तथा साथ ही अपने विद्वान ज्योतिषी से सलाह कर के उनकी कुंडली में राहू का आकलन करवा कर उसका उपचार अनिवार्य रूप से करवाएं तभी इस अशुभ मित्रों के दोष से बचा जा सकेगा,

इस से अपने बच्चों या स्वंम को बचाने के लिए या कोई मित्र आपको धोखा दे रहा है, धोखा चाहे आर्थिक हो या मानसिक हो या शारीरिक रूप से आपको पीड़ित कर रहा हो तो निम्न सिद्ध उपाय कर आप लाभ उठा सकते है.

जन्म कुंडली स्थित पापी ग्रहों का जाप तथा दान आदि कर शांत करवाएं.

विशेष कर राहू का उपचार ज्यादा अनिवार्य है.

प्रत्येक सोमवार गेंहूँ का दान अपनी श्रद्धा अनुसार मंदिर में जा कर करें तो भी लाभ होगा.

पपीता फल के 7 सूखे बीज लेकर काले कपड़ें में छोटी से पोटली ताबीज के साइज़ की बना कर गले में काले धागे में बाँध कर शनिवार धारण करें, इस के करने से उस मित्र के प्रति मन उचाट होने लगेगा,

अपनी जेब में एक मोर का पंख अवश्य रखें. तथा अपने बिस्तर के दांये तरफ 16 मोर के पंख का गुलदस्ता बना कर रखने से बुरे मित्र साथ छोड़ जाते है 



शुभमस्तु !!

ड्रेस(Dress) द्वारा समस्या दूर करें.......

नित्य पहनने वाले कपड़ें भी आपकी समस्या को काफी हद तक दूर करने में सहायक हो जाती है, 

हर समस्या का एक समाधान भी होता है, कपड़ें का रंग अलग अलग समस्या को सुलझाने में सहायता प्रदान करता है.प्रत्येक रंग अपना एक गुण रखता है, रंगों के चयन से उस व्यक्ति का स्वभाव, गुण तथा उस की आदतें व् उसके शुभ अशुभ विचार धारा को पहचाना जा सकता है. उसी प्रकार मनुष्य को जो भी समस्या हो उसी के अनुरूप ऐसे रंगों के कपड़ों का चयन किया जाता है की वह समस्या काफी आसान होकर दूर हो सके.

रंग और कपड़ों का मिलान आज के युग में बहुत प्रभावशाली सिद्ध होता है ऐसा कई बार अनुभव में  भी आ चुका है, शरीर के ऊपरी हिस्सों में पहनने वाले कपडें ज्यादा महत्वपूर्ण होते है तथा उनका असर भी बहुत जल्दी होता देखा गया है.नीचे भाग के पहनने वाले कपड़ें कम फल देते है या देर से उनका फल मिलता है.आज इसी सन्दर्भ में रंग और कपड़ों के मिलान से समस्याओं के अनुसार उपाय लिख रहा हूँ.

http://ptanilji.blogspot.com/2016/05/dress.html
ड्रेस का हमारे जीवन में अत्यंत योगदान रहा है इसी ड्रेस के द्वारा हम किसी विशेष  व्यक्ति को पहचान लेते है जैसे चिकित्सा क्षेत्र में सफेद रंग का महत्व है डोक्टर, नर्स आदि स्टाफ यहाँ तक की हॉस्पिटल के कमरे दरवाजों पर भी सफेद रंग बहुत अधिक मिलता है, पुलिस आदि का भी खाकी रंग तथा रक्षा क्षेत्र में भी इन्ही रंगों से चिन्हित किया गया है, 

रंग हमारे जीवन एक मुख्या आधार बन चुका है रंगों के बिना ये जीवन अन्धकारमय बन जाता है, अतः हमारी समस्याएं भी काफी हद तक इन्हीं रंगों के उपयोग से दूर हो सकती है या उन समस्याओं से राहत मिलने लगती है.

विवाह ..... 

भारतीय ज्योतिष अनुसार पुरुष के विवाह में शुक्र ग्रह का योगदान रह्ता है, तथा महिला की जन्म कुंडली अनुसार वृहस्पति का विवाह में योगदान रहता है अतः शुक्र तथा वृहस्पति के रंगों का संयोजन विवाह में करना चाहिए, इसके लिए महिलाओं को चमकदार और सुंदर गुलाबी, लाल और पीले रंग का मिलान कर ही अपने कपड़ें पहनने चाहिए तथ पुरुष को हलके रंग के कपड़ें सबसे अधिक क्रीम रंग तथा सफेद चमकदार रंग के  कपड़ें शास्त्र में भी उल्लेखित है, इनसे भावी वैवाहिक जीवन  सुखमय व्यतीत होता है.

नौकरी...

नौकरी में अपने क्षेत्र अनुसार कपड़ें पहने जाते है,आप हल्के हरे, ग्रे, क्रीम, कॉरपोरेट सेक्टर में हल्के पीले रंग की टी-शर्ट पहन सकते हैं.आप प्रशासनिक सेवाओं में हल्के नीले या सफेद रंग के कपड़े पहन सकते हैं.आप इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम नीले रंग के कपड़े पहन सकते हैं. एक मीडिया या ग्लैमर से संबंधित काम में चमकदार सफेद या हल्के गुलाबी रंग के कपड़े पहन सकते हैं. एक किसी भी साक्षात्कार में काले या भूरे रंग के कपड़ें धारण कर लाभ उठा सकते है. जब भी विपरीत रंग के कपड़ें पहन कर ऑफिस लागातार जाओ तो कोई ना कोई समस्या अवश्य होने लगती है कई बार नौकरी से सस्पेंड या नौकरी छोड़ने की भी स्थिति बन जाती है अतः अपने कपड़ों पर अधिक ध्यान दें एक ड्रेस बना कर ही पहने, लाभ होगा.

मुकद्दमेबाजी...

कोर्ट में ग्रे रंग के कपड़े पहन कार जाए तो लाभ होगा, विवाह से संबंधित मुकदमेबाजी के लिए जाते समय नीले या काले रंग के कपड़े धारण करने से मुकद्दमा अधिक देर तक नही चलता जल्दी ही उसका निर्णय आपके पक्ष में होने लगता है,संपत्ति संबंधित मुकदमेबाजी के लिए जाने के लिए सफेद रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए  इस से कोर्ट का फैसला आपके पक्ष में होना आरम्भ हो जाएगा. आपराधिक मामले के लिए सफेद तथा नीले रंग के कपड़ों का उपयोग लाभप्रद रहेगा, 

मेडिकल...

यदि आप रोगों से जल्दी छुटकारा पाना चाहते है, शनि और बुध ग्रह में रोगों से लड़ने की क्षमता है, शनि आपको बीमारी के बाद लंबे समय के लिए स्वस्थ रहता है. आप मेडिकल जांच के लिए जाते समय हरे रंग का कपड़ा धारण करें या हरे रंग का रुमाल अपने पास रख कर जाएँ लाभ मिलेगा, अगर आप सर्जरी के लिए जा रहे हैं तो लाल रंग का कपड़ा या रुमाल प्रयोग करें, इस प्रकार से रंग और कपड़ों के मिलान से अनावश्यक खर्च नही होगा तथा बिमारी लम्बे समय तक नही चलेगी जल्दी ही कंट्रोल हो कर आपको स्वस्थ बना देगी.

इसी प्रकार दुसरे क्षेत्रो का वर्णन आगे लेखों में लिखने की कौशिश करूँगा........ 


शुभमस्तु !!

Tuesday, May 17, 2016

सरकारी नौकरी (Govt Job.)का योग.....

आपकी जन्म-कुंडली में सरकारी नौकरी के योग है...या नही ? 

व्यक्ति अपने जॉब के प्रति ज्यादा चिंतित रहता है, और आज के युग में तो सरकारी जॉब एक लाटरी से कम नही है.सरकारी जॉब मिलते ही इस प्रकार ख़ुशी होती है जैसे कोई लाटरी निकल आई हो, इसीलिए हर किसी का यही एक सपना होता है की मेरी सरकारी जॉब हो तथा उसके लिए वो प्रयत्न भी बहुत करता है.  

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में जन्म कुंडली का बहुत महत्व होता है चाहे कोई छोटी या बड़ी समस्याओं के लिए कुंडली के ग्रहों का बहुत बड़ा हाथ होता है. जन्म कुंडली में जिस प्रकार का ग्रह शक्तिशाली होता है उसी प्रकार के परिणाम भी व्यक्ति को प्राप्त होते हैं. कई बार ऐसा होता है कि अथक मेहनत और परिश्रम के बाद भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी प्राप्ति में सफलता नहीं मिल रही होती है. 

सरकारी नौकरी का निर्धारण व्यक्ति की योग्यता, शिक्षा, अनुभव के साथ-साथ उसकी जन्म कुंडली अनुसार ग्रह योगों के कारण भी होता है.आज उसी हर्कारी जॉब के विषय में बताते है की वह कौन से ग्रह योग होते हैं जो सरकारी नौकरी प्राप्ति में मदद करते हैं.

सरकारी जॉब प्राप्त करने के लिए जन्म कुंडली में निम्न योगों का होना अनिवार्य व् शुभ माना जाता है.

http://ptanilji.blogspot.com/2016/05/govt-job.html
जन्म-कुंडली में दशम स्थान को (दसवां स्थान) को तथा छठे भाव को जॉब आदि के लिए जाना जाता है.सरकारी नौकरी के योग को देखने के लिए इसी घर का आंकलन किया जाता है। दशम स्थान में अगर सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति की दृष्टि पड़ रही होती है साथ ही उनका सम्बन्ध छठे भाव से हो तो सरकारी नौकरी का प्रबल योग बन जाता है.


कभी-कभी यह भी देखने में आता है कि जातक की कुंडली में दशम में तो यह ग्रह होते हैं लेकिन फिर भी जातक को संघर्ष करना पड़ रहा होता है तो ऐसे में अगर सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति पर किसी पाप ग्रह (अशुभ ग्रह) की दृष्टि पड़ रही होती है तब जातक को सरकारी नौकरी प्राप्ति में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अतः यह जरूरी है कि आपके यह ग्रह पाप ग्रहों से बचे हुए रहें..


जन्म कुंडली में यदि जातक का लग्न मेष, मिथुन, सिंह, वृश्चिक, वृष या तुला है तो ऐसे में शनि ग्रह और गुरु (वृहस्पति) का एक-दूसरे से केंद्र या त्रिकोण में होना, सरकारी नौकरी के लिए अच्छा योग उत्पन्न करते हैं..


जन्म कुंडली में यदि केंद्र में अगर चन्द्रमा, ब्रहस्पति एक साथ होते हैं तो उस स्थिति में भी सरकारी नौकरी के लिए अच्छे योग बन जाते हैं। साथ ही साथ इसी तरह चन्द्रमा और मंगल भी अगर केन्द्रस्थ हैं तो सरकारी नौकरी की संभावनायें बढ़ जाती हैं..


कुंडली में दसवें घर के बलवान होने से तथा इस घर पर एक या एक से अधिक शुभ ग्रहों का प्रभाव होने से जातक को अपने करियर क्षेत्र में बड़ी सफलताएं मिलतीं हैं तथा इस घर पर एक या एक से अधिक बुरे ग्रहों का प्रभाव होने से कुंडली धारक को आम तौर पर अपने करियर क्षेत्र में अधिक सफलता नहीं मिल पाती है..

ज्योतिष के अन्दर इस तरह की समस्या के लिए उपयुक्त उपचार भी मौजूद हैं। जातक की कुंडली का पूरा आंकलन करने के बाद ही उपायों को सुझाया जा सकता है.. 

जो शुभ ग्रह कमजोर हैं उन्हें बलवान बनाकर और अशुभ ग्रहों को शांत कर, इस तरह की समस्याओं का अंत किया जा सकता है...

आपकी जन्म कुंडली में ऐसे योग की स्थिति किस परकार से है तो अपने निकट के विद्वान ज्योतिषी से संपर्क करें....

इससे उचित मार्गदर्शन मिलेगा.....


शुभमस्तु !!



Wednesday, May 11, 2016

कंगन का चमत्कार.....

भारत वर्ष की परम्परा रही है की सौभाग्यवान महिला अपना श्रृंगार सबसे पहले करती है जिसे प्राचीन काल से हमारे ऋषि मुनियों ने शास्त्रों द्वारा निर्देश दिए है, चूड़िया या कंगन इसमें सबसे महत्वपूर्ण  भूमिका अदा करते है, क्योंकि चूडिया और कंगन ही महिला के साथ हमेशा रहते है दुसरे श्रृंगार तो समय समय पर या किसी उत्सव आदि में किये जाते है,

भारतीय ज्योतिष में भी इन्ही चूड़ियों और कंगन का वैवाहिक जीवन में अत्यधिक महत्व है.आज के युग में यदि हम समाज को देखते है तो लोग इसे प्राचीन सभ्यता कह कर चूड़ी आदि धारण नही करते है, इसी विशेष कारण से आज पारिवारिक कलह और तलाक की समस्याएं बढ़ रही है, 

मेने स्वयं इसका पिछले कई वर्षों से अनुभव किया की तलाक के 76% केसों में चूड़ियाँ व कंगन का अभाव था, भारतीय परम्परा में सुहागिन स्त्री का श्रृंगार सबसे महत्वपूर्ण है जिसमें दैनिक श्रृंगार के रूप में चूडिया, कंगन और मांग का सिन्दूर अत्यधिक महत्वपूर्ण है इसके द्वारा ही वैवाहिक जीवन तो सुखी होता ही है, साथ ही संतान का सुख तथा संतान भी नियंत्रण में रहती है.

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उदाहरण के लिए एक उपाय है जो की सिद्ध और टेस्टेड है की यदि बच्चा माता-पिता की आज्ञा का पालन नही करता अर्थात नियंत्रण में नही है और उसकी आयु 16 वर्ष से कम है तो माँ को अपनी मांग का सिन्दूर अनामिका उंगली से मंगलवार तथा शनिवार रात्री में लेकर बच्चो को तिलक रूप से लगाया जाये तो एक या दो महीने में ही बच्चा सुधरने लगता है. ऐसा सिर्फ मांग के सिन्दूर से ही संभव है यदि दुसरे  श्रृंगार सामग्री का उपयोग किया जाए तो जीवन सुखी हो जाता है. अतः श्रृंगार का आधुनुक युग में भी अधिक महत्व तथा इसके द्वारा हम कई प्रकार की समस्याएं स्वतः ही दूर करने में सक्षम हो जाते है.

यदि सुहागिन महिला चूडिया, कंगन तथा मांग में सिदूर का प्रयोग दैनिक दिनयर्चा में करें तो 65% समस्या अपने आप ही दूर हो जाती है, नही तो आजमा कर देख लो.....

अब आपको चूड़ियाँ और कंगन के ज्योतिषीय महत्व को बताते है, चूड़ियाँ और कंगन का आकार गोल होने से ये चंद्रमा और बुध ग्रह को प्रभावित करते है, चूड़ियाँ और कंगन का सुन्दरता तथा वैवाहिक जीवन से सम्बन्ध है साथ ही चूड़ियाँ और कंगन हाथ की कलाई जिसे मणिबंध कहते है उसे छूते हुए पहनते है जिसका सम्बन्ध स्वास्थ्य से भी होता है.यदि चूड़ियाँ और कंगन को सही रंग निर्देशों अनुसार धारण किया जाए तो पारिवारिक कलह तो समाप्त होता ही है साथ ही महिला का स्वास्थ्य भी बिलकुल ठीक रहने लगता है, संतान उत्पत्ति में कभी सर्जरी नही होती है,

चूड़ियाँ और कंगन को कभी भी भूल कर मंगलवार और शनिवार को नही खरीदना चाहिए, यदि आप सुख समृद्धि चाहती है तो नयी चूड़ियाँ और कंगन को धारण करने से पूर्व माँ गौरी के आगे रख कर ही धारण करें .चूड़ियाँ और कंगन हमेशा सुबह पहने या शाम को सूर्यास्त के बाद जिस से अधिक लाभ होता है.ऐसा करने से पति का किसी दूसरी महिला से कोई भी किसी भी प्रकार का सम्बन्ध नही बनता तथा पति-पत्नी में प्रेम की वृद्धि होती है.

अविवाहित कन्या मिले जुले रंग की चूड़ियाँ और कंगन पहन सकती है, तथा सुहागिन को कभी भी काले तथा सफेद रंग का चूड़ियाँ और कंगन में प्रयोग नही करना चाहियें, तथा चूड़ियाँ और कंगन कांच, सोना और चांदी धातु के ही धारण से लाभ होता है, यदि आदमी भी कड़ा सोना चांदी  ताम्बा या लोहे के धारण कर सकते है. महिला यदि सोना और चांदी को वजन का सम भाग लेकर कंगन गुलाबी रंग के पहने तो प्रेम बढ़ेगा तथा वैवाहिक जीवन हमेशा सुखमय रहेगा.

अविवाहित कन्या यदि जल्दी विवाह की इच्छा रखती है तो लाल रंग का कंगन और लाल रंग के कपड़े को माँ दुर्गा के आगे प्रार्थना कर धारण करें या किसी सुहागिन स्त्री को दान दें. तो जल्दी विवाह का योग बनता है.

संतान की इच्छुक महिला पीले रंग के कांच की चूड़ियाँ और कंगन धारण कर वृहस्पति देव का पूजन कर धारण करें या दान करें तो शीघ्र ही संतान की कामना पूर्ण हो जाती है.

चूड़ियाँ और कंगन को कभी भी मस्तक से स्पर्श नही करवाना चाहिए गलती से भी हाथ माथे में ना लगे इसके कारण विपरीत फल मिलता है....


शुभमस्तु !!

Tuesday, May 10, 2016

आभूषण और ज्योतिष........

हमारी क्या विश्व में किसी भे देश में महिलाओं को आभूषण से बहुत अधिक  लगाव रहता हैं भारतीय  संस्कृति में गहने पहनना एक रस्म और मर्यादा के अन्तर्गत आते हैं। आभूषण एवं गहनों से केवल शारीरिक सौन्दर्य ही नहीं निखरता वरन् इससे स्वास्थ्य रक्षा भी होती हैं। शरीर को सजाने के साथ-साथ अनजाने में गहने हमारे शरीर के लिए चिकित्सा का कार्य भी करते हैं। आभूषण पहनने का चलन उतना ही पुराना हैं जितना कि मानव सभ्यता का विकास। आभूषण केवल महिलाएँ ही धारण नहीं करती बल्कि पुरूष भी उन्हें किसी न किसी रूप में धारण करते आये हैं। विज्ञान की आधुनिक खोज से भी आभूषणों द्वारा स्वास्थ्य लाभ की पुष्टि हो चुकी हैं।

कुछ महिला जातक धनी होने के बावजूद भी कम जेवर पहनने का शौक रखती हैं, तो कुछ महिला जातक अधिक से अधिक आभूषण खरीदने के प्रयास करती हैं। बाजार, शादी या अन्य समारोहों में जाते समय अधिक से अधिक गहने पहनकर खुबसूरती का पर्याय बनती हैं। इसके स्थान पर कुछ महिला जातक साधारण रहती हैं। आइए जानते हैं इसके ज्यातिषीय कारण जो निम्न हैं
आभूषण कम पसन्द आने के ग्रह योग: - मकर एवं कुंभ लग्न वाली महिला जातकों को जेवर (आभूषण) पसन्द कम होते हैं। यदि लग्नेश शनि के नक्षत्र में हो तो ऐसा होता हैं। चर्तुथ भाव में शनि हो और चतुर्थेश निर्बल हो तो यह आभूषण ना पसन्द का कारण बनते हैं। शुक्र, शनि के साथ युति में हैं और शनि का जातक के लग्न से सम्बन्ध हो तो जेवर पसन्द नहीं आते। यदि कुण्डली में भाग्य स्थान में शनि हो, लग्नेश निर्बल हो अथवा शनि की दृष्टि हो तो भी महिला को आभूषण कम पसन्द होते हैं। यदि महिला जातक की कुण्डली में शनि द्वादश भाव में बैठा हो और शुक्र कमजोर होने पर भी जेवर का शौक नहीं रहता हैं।

आभूषण अधिक पसन्द आने के ग्रह योग: - यदि कुण्डली में शुक्र चर्तुथ भाव में, तुला, मीन या वृषभ राशियों में बैठा हो उस जातक को आभूषण अधिक पसन्द होगा। जातक की कुण्डली में सप्तम भाव में शुक्र प्रबल होकर स्थित हैं तो जातक को आभूषण अधिक पसन्द होगें। जन्म कुण्डली में शुक्र व चन्द्र के बीच युति सम्बन्ध, राशि परिवर्तन, दृष्टि सम्बन्ध या नक्षत्रीय सम्बन्ध स्थापित हो ऐसी महिला जातक को आभूषण अधिक पसन्द होंगे। यदि एकादश भाव या लग्न में लग्नेश, आयेश और राहू एक साथ बैठे हो तो भी जातिका को आभूषण पसंद होगें। यदि कुण्डली में शुक्र लग्न, चर्तुथ, पंचम, सप्तम, एकादश या द्वादश भाव में हो तो उन महिला जातकों को भी आभूषण अधिक प्रिय होंगे। यदि कुण्डली में शुक्र चतुर्थेश के साथ युति दृष्टि अथवा राशि परिवर्तन का सम्बन्ध बना रहा हो तो वह जेवर पसन्द आने का कारण बनेगा।
उपरोक्त कारणों में मुख्य रूप से देखा जाए तो ज्योतिष में शुक्र ग्रह एवं चतुर्थ भाव जेवर से सम्बन्ध बनाता है। सामान्यतः वृषभ राशि या लग्न, तुला राशि या लग्न की महिला जातक को जेवर तुलनात्मक रूप से अधिक प्रिय होगें। इसी प्रकार महिला जातक की कुण्डली का लग्नेश (लग्न का स्वामी ग्रह) यदि भरणी नक्षत्र, पूर्वाषाढ़ या पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में होने पर भी आभूषण प्रिय होंगे।
अतः उक्त दोनों प्रकार की स्थितियां ही महिला जातक की आभूषण के प्रति रूची या अरूची को दर्शाती हैं।
इसी से पता चल जाता हैं कि महिला जातक आभूषण प्रिया होगी या नहीं।

शुभमस्तु !!